बस्तर संभाग और अबूझमाड़ के सघन वन अंचलों में संचालित संस्था के प्रमुख अभियान
नारायणपुर जिला मुख्यालय में स्थित यह हमारा सबसे मुख्य केंद्र है। विशेष रूप से नक्सल पीड़ित बालिकाओं के लिए समर्पित एक ऐसा आश्रय जहाँ उन्हें परिवार जैसा माहौल, सुरक्षा, रहने-खाने की पूर्ण व्यवस्था और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलती है।
महिमा गवाडी (25), माटबेडा (32), सुलेंगा (75) और मुस्तलनार (32) जैसे सुदूर गाँवों में संचालित हमारे विद्यालय, जहाँ बच्चों को बुनियादी शिक्षा के साथ-साथ अच्छे संस्कार और जीवन मूल्य सिखाए जाते हैं।
अबूझमाड़ के उस हृदय स्थल में जहाँ पहुँचना भी एक बड़ी चुनौती है, वहाँ भी शिक्षा का दीप निरंतर जल रहा है। परित्यक्त भवनों का पुनरुद्धार कर स्थानीय शिक्षकों की नियुक्ति और निरंतर रसद आपूर्ति से कक्षाएं संचालित हैं।
कोलिंग, जिरामतरई और दरभा में महिलाओं और युवतियों के लिए सिलाई-कढ़ाई केंद्र चलाए जा रहे हैं, ताकि वे हुनर सीखकर सम्मानपूर्वक अपनी आजीविका कमा सकें और आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें।
कुआकोंडा केंद्र में 60 से अधिक स्थानीय युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार किया जा रहा है, ताकि वे सुरक्षा बलों में शामिल होकर देश और अपने क्षेत्र की सेवा कर सकें।
उफनती नदियों और घने जंगलों को पार कर विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाना। साथ ही इतपाल (बीजापुर) में इमली कैंडी, महुआ जैम, आमचूर, चिरौंजी व लाख प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना।